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पार्क में बहादुर माया

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पार्क में बहादुर माया

माया के पास एक लाल गाड़ी है। गाड़ी थोड़ी चरमराहट करती है। माया पार्क जाती है।

लोके वहां है। लोके एक छोटा खरगोश है। उनके पास एक बाल्टी और एक फावड़ा है।

एक बड़ी कलहंस आती है। कलहंस का नाम ग्रेटा है। ग्रेटा सारे फावड़े ले लेती है।

लोके अपनी खाली बाल्टी पकड़ता है। माया का पेट चुलबुला लगता है। उसका दिल बूम, बूम कहता है। माया छिपना चाहती है।

माया लोके का पंजा पकड़ती है। माया सांस अंदर लेती है। माया सांस बाहर छोड़ती है। माया आगे बढ़ती है।

"रुको," माया कहती है। "हम बारी-बारी से लेंगे।"

ग्रेटा देखती है। उसकी आँखें चमक रही हैं। उसकी चोंच बड़ी है। ग्रेटा "होंक-होंक" कहती है। ग्रेटा अपने पंख नीचे करती है।

"ठीक है," ग्रेटा कहती है। "एक फावड़ा तुम्हारे लिए। एक लोके के लिए।"

वे खोदते हैं। रेत में पैट, पैट। बाल्टी भर जाती है। वे एक मीनार बनाते हैं।

ग्रेटा एक छड़ी लाती है। छड़ी एक झंडा बन जाती है।

मीनार खड़ी है। माया मुस्कुराती है। लोके मुस्कुराता है। ग्रेटा मुस्कुराती है। हर कोई शामिल होता है। माया बहादुर है। माया का दिल अब शांत है।

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समाप्त

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