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उत्तरी हवा और सूरज

ईसप

उत्तरी हवा और सूरज

चमकीले नीले आकाश में ऊँचे, उत्तरी हवा और सूरज बात कर रहे थे। वे पुराने पड़ोसी थे। कभी-कभी वे दोस्ताना थे। कभी-कभी उन्हें डींग मारना पसंद था।

"मैं सबसे मजबूत हूँ," उत्तरी हवा ने कहा। उसने अपने ठंडे गाल फुलाए।

"मैं ज्यादा मजबूत हूँ," सूरज ने गर्म मुस्कान के साथ कहा। उसकी सुनहरी रोशनी धीरे से चमक रही थी।

उन्होंने नीचे देखा और एक यात्री को सड़क पर चलते हुए देखा। यात्री ने एक बड़ा, गर्म लबादा (cloak) पहना था। यह उसके चारों ओर एक कंबल की तरह लिपटा हुआ था।

"चलो एक परीक्षा लेते हैं," सूरज ने कहा। "जो कोई भी यात्री को अपना लबादा उतारने के लिए मजबूर कर सकता है, वह सबसे मजबूत है।"

"हा! आसान," उत्तरी हवा ने गर्जना की। "मैं पहले जाऊंगा।"

उत्तरी हवा ने गहरी सांस ली। वह उड़ा और उड़ा। वू! पेड़ झुक गए। पत्तियां हवा में नाचने लगीं। सड़क के चारों ओर धूल घूमने लगी।

यात्री कांप गया। "ब्री!" उसने कहा। उसने अपने लबादे को अपने कंधों के चारों ओर कस लिया। उसने किनारों को अपनी ठुड्डी के नीचे करीब रखा।

उत्तरी हवा जोर से उड़ा। वूश! उसने सड़क के नीचे एक जंगली झोंका भेजा। यात्री की टोपी लगभग उड़ गई, लेकिन उसने उसे पकड़ लिया और थामे रहा। उसने अपने लबादे को और भी कसकर लपेटा और उसे एक गांठ में बांध दिया।

"मुझे गर्म रखना चाहिए," यात्री ने बकबक दांतों के माध्यम से कहा। उसने अपने कंधों को झुकाया और चलता रहा।

उत्तरी हवा ने एक बार और कोशिश की। उसने अपना सबसे बड़ा, सबसे मजबूत विस्फोट उड़ाया। लेकिन जितना अधिक वह उड़ा, यात्री ने अपने लबादे को उतना ही कसकर पकड़ लिया। अंत में, उत्तरी हवा के पास कोई सांस नहीं बची थी। उसने हफ किया और पफ किया और हार मान ली।

"यह तुम्हारी बारी है," उसने सूरज को बड़बड़ाया।

सूरज एक छोटे से बादल के पीछे से झांका। उसने नीचे एक सौम्य, शांत गर्मी भेजी। यह एक नरम गले की तरह महसूस हुआ।

यात्री को तुरंत बदलाव महसूस हुआ। "आह," उसने आह भरी। उसने अपने लबादे की गांठ ढीली कर दी। उसने थोड़ी गर्म हवा अंदर आने दी।

सूरज थोड़ा और चमकने लगा। खेत झिलमिला उठे। यात्री के पैरों के नीचे सड़क पर पत्थर गर्म हो गए। एक पक्षी ने गाया।

जल्द ही यात्री मुस्कुराया। उसने अपना माथा पोंछा। "गर्मी हो रही है," उसने कहा। उसने अपना लबादा खोला। सूरज गर्मजोशी से चमकता था - दयालु और स्थिर, बहुत गर्म नहीं।

अंत में यात्री ने अपना लबादा उतार दिया। उसने इसे अपनी बांह पर मोड़ दिया, खुश और आरामदायक, और धूप वाली सड़क पर चला गया।

सूरज उत्तरी हवा की ओर मुड़ा। "तुमने देखा," उसने धीरे से कहा, "कोमल गर्मी वह कर सकती है जो बल नहीं कर सकता।"

उत्तरी हवा ने सिर हिलाया, अब चुप। उसने कुछ नया सीखा था।

और यात्री, जो उनकी छोटी परीक्षा के बारे में कुछ नहीं जानता था, सुनहरे दिन में हल्का और खुशहाल अपने रास्ते पर चला गया।

नैतिक: कोमल दया और गर्म अनुनय (persuasion) ठंडे बल से बेहतर काम करते हैं।

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समाप्त

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